R24News:जानिए, क्‍यों चीन की कंपनी को 5जी से बाहर रखना बना मजबूरी, सुरक्षा के लिहाज से भी चिंताजनक

क्‍यों चीन की कंपनी को 5जी से बाहर रखना बना मजबूरी

5G Networks कई देशों में भारतीय कंपनियां चीनी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में पछाड़ रही हैं फिर भी भारत में उन्हें विभिन्न अवसरों से वंचित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई।

5G Networks:  भारत में स्मार्टफोन के जरिये इंटरनेट का इस्तेमाल निरंतर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सरकार और टेलीकॉम कंपनियां 5जी नेटवर्क की ओर बढ़ रही हैं। मोबाइल नेटवर्क को 5जी के साथ अपग्रेड करने की कवायद जारी है। चाहे 2जी हो, 3जी या 4जी सभी तकनीकें ज्यादातर विदेशी कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराई जाती रही हैं, वे ही इनका संचालन भी करती हैं। दूरसंचार विभाग ने भारत में 5जी परीक्षण करने के लिए चीनी कंपनी हुआवे को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस परीक्षण की अनुमति में हुआवे के शामिल होने से एक चिंता की लहर है, क्योंकि इस कंपनी के दुनिया भर में कार्यकलाप इस आशंका को पुष्ट करते हैं कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचा सकती है।

हुआवे को सैद्धांतिक अनुमोदन का मतलब यह नहीं है कि अनुबंध भी इसी कंपनी को दिया जाएगा, लेकिन यह संदेह बना रहेगा कि यह कंपनी टेंडर प्राप्त करने के लिए कम कीमत का ऑफर दे सकती है। यह कंपनी कई देशों में प्रतिबंधित है या उस पर कई प्रकार की बंदिशें लगाई गई हैं। इसके पर्याप्त सबूत हैं कि चीनी कंपनियां अपने उपकरणों के माध्यम से संवेदनशील सूचनाओं की चोरी करती रही हैं। कई देशों को संदेह है कि चीनी कंपनियां साइबर हैकिंग के माध्यम से सैन्य एवं तकनीकी रहस्यों की चोरी करने में भी लिप्त हैं। इसका अर्थ यह है कि हमारे दूरसंचार नेटवर्क में चीनी कंपनियों की उपस्थिति हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता करेगी।

दुर्भाग्यपूर्ण है कि जानबूझ कर कुछ नौकरशाहों एवं निहित स्वार्थों द्वारा यह भ्रांति फैलाई जाती है कि भारत के पास 5जी या 6जी के लिए पर्याप्त सामथ्र्य नहीं है। वास्तविकता यह है कि भारत के पास बड़े पैमाने पर काम करने वाले उद्यमियों की एक शृंखला है। एक भारतीय कंपनी ने तो अमेरिका में अपनी 6जी प्रौद्योगिकी का पेटेंट भी करवाया हुआ है। ऐसे में भारतीय उद्यमियों को इस क्षेत्र में विकास हेतु सरकारी संरक्षण की आवश्यकता है। टेलीकॉम प्रौद्योगिकी में बड़ी छलांग लगाने हेतु यह सरकारी संरक्षण एक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, जिससे देश की सुरक्षा से समझौता किए बिना हम अपने देश में दूरसंचार नेटवर्क स्थापित कर सकेंगे। वे देश जो इस प्रौद्योगिकी में आगे बढ़े हैं, उन सबमें सरकारी संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

हुआवे कंपनी को भी चीन सरकार द्वारा 75 बिलियन डॉलर की मदद मिली है। एक तरफ जहां भारत में हुआवे को 5जी परीक्षण की अनुमति दी जा रही है, वहीं चीन सरकार भारत समेत किसी भी देश की कंपनियों के उपकरणों एवं सॉफ्टवेयर को बाजार पहुंच की अनुमति नहीं देती है। ऐसे में चीनी कंपनियों को अनुमति देना पारस्परिकता के सिद्धांत के भी खिलाफ है। यहां यह कहना भी सही नहीं है कि भारत सरकार चीनी कंपनियों द्वारा 5जी प्रौद्योगिकी लाने के खतरों से अवगत नहीं है।

 

पूर्व दूरसंचार सचिव अरूणा सुंदरराजन ने कहा था कि दूरसंचार विभाग दुनिया भर में हो रहे घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रखे हुए है। हुआवे कंपनी को तभी अनुमति दी जाएगी, जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। वैश्विक स्तर पर हुआवे सहित चीनी कंपनियों पर यह आरोप लग रहे हैं कि वे कम कीमत की ऑफर देकर टेंडर हासिल कर रहे हैं, और इसके लिए चीन सरकार उन्हें पूरी मदद करती है। एक बार हमारी निर्भरता उन पर होने के बाद हमारी मजबूरी का चीन की सरकार कभी भी नाजायज फायदा उठा सकती है। दूरसंचार में स्वदेशी उपकरणों से ज्यादा कुछ भी सुरक्षित नहीं है। हाल में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य प्रो. वीझिननाथन कामाकोटी ने कहा है कि सुरक्षा जोखिम विदेशी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सामान्य रूप से निहित हैं, और 5जी उपकरण विशेष रूप से इन जोखिमों को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशीकरण ही 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी है।

Posted By: Abhenav mishra R24news

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